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*कोरोना कॉल में बेज़बान पशुओं की सेवा कर रहे हैं माँ-बेटे*

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*कोरोना कॉल में बेज़बान पशुओं की सेवा कर रहे हैं माँ-बेटे*



सीतापुर             शरद कपूर
व्यक्ति में यदि सेवाभाव का दृढ़ संकल्प है तो विषम परिस्थितियां भी उसे अपने इरादे से नहीं डिगा सकती हैं, लखनऊ के अलीगंज निवासी माँ - बेटे ने कोरोना वायरस जैसी महामारी में भी बिना डरे हुए बेज़बान जानवरों की सेवा का दृढ़ संकल्प लॉक डाउन की शुरुआत से जो शुरू हुआ वो आज भी निरंतर जारी है | माँ - बेटे की यह जोड़ी प्रतिदिन पशुओं के लिए भोजन लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं और घूमती गायों व सड़क पर घूमने वाले कुत्तो को भोजन कराते हैं |
                अलीगंज क्षेत्र में रहने वाली श्रीमती दुर्गेश मेहरोत्रा व उनका पुत्र उत्कर्ष मेहरोत्रा पशुओं को भोजन कराने के बाद बड़ा आत्म संतुष्टि महसूस करते हैं | यह दोनों माँ - बेटे की जोड़ी जहां गाय माता को आटा, गुड़ एवं अपने हाथ से बनी रोटी खिला रहे हैं, वहीं कुत्तों के लिए यह लोग दूध ब्रेड खिला रहे हैं | अब तो आलम यह हो गया है कि गाय व कुत्ते इन माँ - बेटे को देखते ही खुद ब खुद इनके पास चले आते हैं | मोबाइल फोन पर हुई बातचीत के दौरान श्रीमती दुर्गेश मेहरोत्रा व उत्कर्ष मेहरोत्रा ने बताया कि देश में लॉक डाउन की घोषणा के बाद ही हम लोगों के मन में यह ख्याल आया कि इस लॉक डाउन में जो जानवर आवारा घूमते हैं आखिर इनको खाना पानी कहां से मिलेगा | क्योंकि आम दिनों में तो जगह जगह लगने वाली सब्जी की दुकानों व होटलों आदि से इन बेजुबानो को भोजन मिल जाता था | परन्तु आखिर इस लॉक डाउन में इनका पेट कैसे भरेगा |
            यह दोनों बताते हैं कि बस यहीं से ईश्वर ने इनका पेट भरने की प्रेरणा दी, जिसके तहत सबसे पहले अपने घर के सामने बड़ी सी नांद लाकर रख कर उसमें पानी भरा, जिससे इस चिलचिलाती धूप व गर्मी में जानवरों के लिए पानी की उपलब्धता हो सके | यह माँ - बेटे की जोड़ी प्रतिदिन सुबह घर से आटा, गुड़, रोटी, ब्रेड एवं दूध के पैकेट लेकर घर से निकल पड़ते हैं इनका यही क्रम शाम को भी रहता है | महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रीमती दुर्गेश मेहरोत्रा इस पुनीत कार्य के लिए ना तो किसी संस्था से मदद ले रही हैं ना ही पशुओं के भोजन के लिए वह किसी अन्य घर से आटा आदि एकत्र कर रही हैं, वह कहती हैं भगवान का दिया इतना कुछ है कि इन बेजुबानो की सेवा स्वतःही की जा सकती है और अंत में वह बताती हैं कि लॉक डाउन से शुरू हुई पशुओं की सेवा अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है | इन माँ बेटे के इस पुनीत कार्य की क्षेत्र के लोग खुलेमन से सराहना कर इन दोनों का उत्साह वर्धन कर रहे हैं |

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