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गांवो की ओर कोरोना वायरस का मोड, शुभ संकेत नहीं

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*गांवो की ओर  कोरोना वायरस  का मोड, शुभ संकेत नहीं*



*सीतापुर*          *शरद कपूर*

कोरोना वायरस महामारी चीन से चल कर सम्पूर्ण विश्व में जिस तरह से अपना तांडव मचाया है  और बड़ी संख्या में जन-धन की हानि हो रही है   विकास का पहिया रुक गया है लोक पूरी तरह से पीड़ित महसूस कर रहे हैं उससे एक तरफ पूरी दुनिया चिंतित थी  किंतु अब इसका असर  भारत के पहले प्रमुख  राज्यों में  हावी हुआ  और अब धीरे-धीरे करके  ग्रामीण क्षेत्र की तरफ  अपना मुख मोड़ दिया है  जो आने वाले समय के लिए शुभ संकेत नहीं है।अभी तक इसकी दहसत भारत देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में थी लेकिन वर्तमान में स्थित ही उलट दिख रही है क्यों कि यह वायरस अब शहरों से नहीं गांवों में धमक चुका है ,जिसका मुख्य कारण प्रवासी मजदूरों का गांवों की ओर आना है।अब कोई दिल्ली से तो कोई मुम्बई महाराष्ट्र गुजरात पंजाब  तो कोई किसी दूसरे बड़े शहर से आ रहा है। और संक्रमण बाद में जांचोपरांत मिल रहे हैं।अब ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है।लोग अपने घरों से निकलने से जहां खुद डरने लगे हैं वहीं आये हुए परदेशी को दूर से देखना भी पसंद नहीं कर रहे हैं।
 कोरोनावायरस ने इतना बड़ा भय पैदा कर दिया है कि अपने भी पराए हो गाए। समझदार लोग क्वारंटीन का कर रहे हैं पालन कुछ तो क्वारंटीन होने का महज बहाना करते हैं मोबाइल उनका क्वारंटीन स्थल पर रहता है तो खुद गायब रहते हैं हालांकि निगरानी टीम भी कहीं पीछे नहीं है कार्रवाई भी होती लेकिन ऐसे  बहुतेरे लोगों के समझ में नहीं आता कि जहां महामारी से विश्व झटके के पे झटका खा रहा है संक्रमण बढ़ रहा है तो हम सतर्क रहें तथा खुद के साथ साथ दूसरों को बचाएं। फिलहाल प्रवासी मजदूरों के मामलों में पुलिस विभाग व निगरानी आदि में लगे अन्य लोगों को और चौकसी बढ़ाने की आवश्यकता है।वर्ना तो करनी का फल कोरोना देगा।
एक बात यह भी सोचनीय है कि जिस परदेशी की कमाई के बल पर लोगों के मकान बनें कृषि या अन्य उपयोग हेतु जमीन खरीदी घर की बहू बेटियों माताओं के गहने आदि तैयार हुए आज उसी परदेशी से दूरी बनाकर 21 दिन का गुजारा आवश्यक हो गया है और यह देन हमारी आपकी नहीं कोरोनावायरस जैसी महामारी की है इसमें किसी का दोष नहीं दूरी बनाकर रहने से हम और हमारा वही परदेशी सुरक्षित है तो आगे फिर सब कुछ पहले जैसा ही हो जाएगा,काल चक्र चल रहा है और हमें मिलकर इस काल चक्र को काटना है कटवाना नहीं है।यदि हम सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं हमारी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस कर्मी स्वास्थ्य कर्मी आदि का यदि सहयोग करते हैं नियम और क़ानून के दायरे में रहते हैं तो कोरोना वायरस जैसी महामारी हारेगी और हम जीतेंगे।
            यहां पर यह बताते चले कि बीते सप्ताह महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात एवं हरियाणा आदि प्रदेशों से बड़ी संख्या में कामगार मजदूर विभिन्न माध्यमो से सीतापुर आए हैं, जो सरकारी साधनों से जिले में आए हैं उनका तो ब्यौरा शासन प्रशासन के पास उपलब्ध है | परन्तु चिंता का विषय वो प्रवासी कामगार मजदूर भाई हैं जो पलायन कर पदयात्रा या अन्य साधनों से अपने अपने घरों को आए हैं | हलांकि कुछ एक स्थानों पर ग्रामवासियों ने प्रधान के सहयोग से आने वाले प्रवासियों को गाँव के बाहर ही स्कूल आदि में 14 दिन तक रोकने का प्रयास किया है |
         इसी क्रम में बीते एक सप्ताह में बाहर से आए प्रवासी मजदूरों में बिसबाँ तहसील मुख्यालय स्थिति क्वारंटीन सेंटर में अब तक कुल 22 कोरोना पॉजटिव मरीज मिल चुके हैं | गुरूवार की देर रात में भी इन्हीं प्रवासी मजदूरों में से पांच और लोगों की रिपोर्ट पॉजटिव पाए जाने से जिले में हड़कम्प मच गया था | वैसे तो सीतापुर जिले में कोरोना पॉजटिव की संख्या शून्य हो चुकी थी, पर बाहर से आए लोगों के चलते पॉजटिव की संख्या फिर 22 पर पहुंच गई है | क्वारंटीन किये गये लोगों में अभी कइयों की रिपोर्ट आना शेष भी है | अब यह अभी भविष्य के गर्भ में है कि सीतापुर जिले में कोरोना पॉजटिव मरीजों की संख्या कहां पर जा कर ठहरेगी |

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