नहरों का अस्तित्व खतरे में, किसानी हो रही प्रभावित - Ideal India News

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नहरों का अस्तित्व खतरे में, किसानी हो रही प्रभावित

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Girish Chandra Yadav

मऊ : एशिया की सबसे बड़ी पंप नहरों में शुमार दोहरीघाट पंप नहर सिल्ट सफाई के अभाव में सिकुड़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि इसकी सफाई होती ही नहीं है, सफाई होती है महज कागजों में और इसके नाम पर प्रतिवर्ष लंबी रकम डकार ली जाती है। हरित क्रांति के उद्देश्य से तत्कालीन सिचाई मंत्री पं.कमलापति त्रिपाठी ने घोसी लोकसभा के प्रथम सांसद पं.अलगू राय शास्त्री की मांग पर दोहरीघाट पंप कैनाल सहित कई नहरों की स्थापना कराई थी। अब विभाग व प्रशासन की कार्यप्रणाली तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण हरित क्रांति एवं किसानों के सपनों पर ग्रहण लग गया है। नहरें सफेद हाथी साबित हो रही हैं। किसानों को नहरों में समय से जलापूर्ति न होने के कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तो निजी संसाधनों से सिचाई करती पड़ती है और उसके बाद राजस्व भी देना पड़ता है। नहरों का जायजा लिया गया तो पता चला कि वे उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। एक जमाने में एशिया की दूसरी सबसे बड़ी नहर परियोजना दोहरीघाट पंप कैनाल आज अपनी पहचान ही खोती जा रही है। पंप नहर का विस्तार लगभग 350 किलोमीटर के दायरे में है। हर साल नहर की सफाई न होने के कारण इसकी गहराई व चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही है। बुजुर्ग किसानों की मानें तो पहले नहर की चौड़ाई 10 से 12 मीटर थी लेकिन अब सिकुड़कर 05 से 06 मीटर हो गई है। इसके कारण कुलाबा तक पानी ही नहीं आता है। किसानों को पंपिग सेट की सहायता लेनी पड़ती है।

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